तो यह है अन्नाशलाका। तुलसीदास की रामशलाका तो आपने सुनी होगी। अब इस अन्नामय माहौल में जरा अन्नाशलाका भी देख लीजिए।

अन्ना शलाका का हर वर्ग नीचे की नौ चौपाइयों से संबद्ध है, जिसमें आपके लिए एक सुझाव छुपा हुआ है।  अन्ना का स्मरण कर आँखें मूंदकर (खोलकर भी चलेगा) किसी भी ख़ाने पर उंगली रखें। ध्यान रहे अंगूठा नहीं। फिर उस वर्ग यानि खाने से आगे नवें खाने पर जाएँ। उस खाने में लिखे वर्ण या शब्दांश को लिख लें या याद रख लें। मात्रा भी ठीक से ध्यान रखें। जैसे के बाद आए तो इसका अर्थ का होगा। यह नवें खाने तक जाने का क्रम तब तक जारी रखें जब तक आप शुरु के खाने तक (जिसे आपने शुरु में चुना था) वापस आ न जाएँ। यह काम पूरी श्रद्धा के साथ करें वरना फल खट्टा भी हो सकता है
अन्ना शलाका



अब आपने चौपाई तो लिख ली है या याद रख लिया होगा। अब फल भी देख लीजिए।

1) भ्रष्ट जनों की सुनो कहानी । एक दिन सबने मन में ठानी॥
उत्तर: कहानी पूरी सुन लीजिए।
2) लोकपाल  बनवाएंगे  हम । उसे  पकाकर  खाएंगे  हम ॥
उत्तर: जल्द ही बनेगा भाई। देखने को तैयार रहिए।
3) चार जनों ने शोर मचाया । अन्ना  को  सबने  पगलाया।।
उत्तर: बस आप ठीक रहिए। वे चारों बड़े चालाक किस्म के जंतु हैं।
4) अनशन पर बैठे तब अन्ना।  उनकी पूरी हुई तमन्ना॥
उत्तर: अनशन के चित्र और खबर बगल के चाय-बिस्कुट वाले के यहाँ अखबार में देख लीजिए।
5) दिखता चारों ओर तमाशा। कहीं निराशा कहीं हताशा॥
उत्तर: कहानी जारी है। निराश न होइये।
6) आगे तब नेताजी आए। अन्ना मन ही मन मुस्काए॥
उत्तर: जल्द ही अन्ना मुस्काएंगे। बस थोड़ा सा इन्तजार कीजिए।
7) लोकपाल बन जाएगा अब। अब देखेगी जनता करतब॥
उत्तर: लीजिए लोकपाल बन गया। जनता के साथ करतब देखिए।
8) एक शिकायत अब है आई। देखो क्या होता है भाई॥
उत्तर: क्या होगा। अन्दाजा लगाइए।
9) पता चला अब इनका नाता। लोकपाल विधि, वही विधाता॥
उत्तर: लीजिए, यह भी तीर बेकार गया। सारा खर्चा और चिल्लाना बेकार। शोक मनाइए।
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