23 जून 2011 यानि भारत के महापतन का 244 साल पूरे हो गए। जी हाँ, 23 जून 1757 के दिन ही भारत में अंग्रेजी राज्य का संस्थापक राबर्ट क्लाइव भारत में विजेता बना था। सिराजुद्दौला की हार का कारण बना था मीरजाफर। अलग अलग जगहों पर भारतीय सेना और ब्रिटिश सेना की संख्या अलग-अलग दी गई है लेकिन हर जगह एक बात साफ है यह युद्ध लालच और पदलोपुपता के चलते हारकर भारत ने अपने इतिहास में सबसे काला दिन लिख दिया। इस वजह से अंग्रेजी सरकारों और गद्दार हिन्दुस्तानियों के चलते हमारे देश के लाखों लोग मारे गए। अगर देखा जाए तो सबकी मौत का कारण है- अकेला मीरजाफर। यह दुष्ट सिराजुद्दौला की सेना का सेनापति था। सिराजुद्दौला जिसने सबसे पहले अंग्रेजों के खिलाफ़ लड़ने की ठानी लेकिन बेचारा देश को बेचने वालों की वजह से मारा गया।
उसी पलासी के मैदान का रेखाचित्र जहाँ 23 जून 1757 को सिराजुद्दौला के सैनिकों ने देश के लिए अपनी जान गँवाई।

      इस युद्ध के आँकड़े इस प्रकार दिए गए हैं। अलग अलग जगह भिन्न-भिन्न आँकड़े दिए हुए हैं।

हिन्दी विकीपीडिया
     सिराजुद्दौला : 35000 पैदल और 15000 अश्वारोही सेना। लेकिन मीरजाफर ने इनमें से 45000 सैनिकों को नहीं लड़ने दिया।
http://www.historyofwar.org/articles/battles_plassey.html के अनुसार बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के पास 50000 से ज्यादा और राबर्ट क्लाइव के पास 3000 से ज्यादा आदमी थे। इस 3000 में 2000 से ज्यादा भारतीय लोग थे।
     
एक और जगह इस पर विस्तार से चर्चा की गई है।
           
            मैकाले ने लिखा है कि लगभग 60 हजार सिपाही राबर्ट क्लाइव के सामने हार गए। लेकिन एक वेबसाइट के अनुसार सैनिकों की संख्या 4400 और 50000 से अधिक थी। फिर एक स्रोत का कहना है कि राबर्ट क्लाइव के सैनिकों की संख्या 300 और सिराजुद्दौला के सैनिकों की संख्या 50000 से अधिक थी। हालांकि यह जानकारी राजीव दीक्षित ने दी थी लेकिन उनकी यह बात गलत है कि उस समय अंग्रेजों की सेना नेपोलियन बोनापार्ट के खिलाफ़ युद्धरत थी क्योंकि 1815 में वाटरलू की लड़ाई लड़नेवाला नेपोलियन 1757 में युद्ध नहीं कर सकता। 1769 में पैदा होनेवाले की यह बात एकदम गलत है कि वह 1757 में युद्ध कर रहा था। इसलिए यह बात जो हिन्दी विकीपीडिया ने भी लिखी है सौ प्रतिशत गलत है। यह बात (जो हिन्दी विकीपीडिया की है) पूरी तरह से राजीव दीक्षित के व्याख्यान से ली गई है।
ऐसे दिखता था 1756 में कलकत्ता
(मुझे अफसोस है कि चित्र मैं हिन्दी में नहीं दिखा पा रहा हूँ। जिन स्त्रोतों से लिए गए हैं वे अंग्रेजी में हैं।)
      चाहे जो कुछ हो लेकिन यह दिन भारतीय आधुनिक इतिहास का सबसे काला दिन तो है ही क्योंकि इसी दिन भारत में अंग्रेजी शासन की शुरुआत किसी न किसी रुप में होती है। 



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